शहादतों का दौर

पुलवामा की शहादतों की अभी चिताएं शांत हुई न थी के ,१६ और १८ फ़रवरी को देहरादून के दो सेना के मेजर (मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट (इंजीनियरिंग कोर ) और मेजर विभूति ढौंढियाल (५५ राष्ट्रीय राइफल्स  )  की शहादत कश्मीर के राजौरी और पुलवामा में हो गयी | ये १४ फ़रवरी से चौथी शहीदी है जो सेना क जवानो ने उत्तराखंड से दी, इससे पहले CRPF क जवान मोहनलाल रतूड़ी और वीरेंद्र सिंह को हमने पुलवामा के आत्मघाती हमले में खो दिया | दोनों ही मेजर देहरादून के सेंट जोसेफ़ स्कूल से पढ़े थे और मेजर चित्रेश की शादी मार्च में होने वाली थी, जबकि मेजर विभूति एक साल से शादी शुदा थे |  देहरादून वासियों ने मेजर चित्रेश की अंतिम यात्रा में उन्हें नम  आखो से विदाई दी और देशभक्ति भरे जोशीले नारो से आपने गुस्से को व्यक्त किया | पुलवामा हादसों के बादइतनी भयावह तस्वीर ANI  से प्राप्तहो रही थी की उन्हे बयां करना मुशिकल है| मेजर विभूति ढौंढियाल की खबर ने तो जैसे देहरादून क हर आदमी का दिल दहला दिया है, लगातार आ रही जवानो की शहीदी की खबरों ने न सिर्फ ये एहसास दिलाया है के उत्तराखण्ड वीर सपूतो की जननी है पर यह भी भरोसा दिलाया है के धर्म या मजहब देश से ऊंचा नहीं होता | मुझे ये सोचकर गर्व होता है क देहरादून में लोगो ने अफवाहों को गले लगाने  के बजाये अपने विवेक से काम लिया | शहेला रशीद के ट्वीट क बाद दूँ पुलिस की एसएसपी हरकत में आयी और उन्होंने ट्विटर के  माध्यम से शहेला की बातो को  बताकर FIR दर्ज की|वही शहेला बजरंगदल के लोगों के खिलाफ लगातार ट्वीट कर रहीं हैं|


सोशल मीडिया की ताकत का दुरूपयोग दोनों ही विंग वाले कर रहे है, ऐसे में वक़्त आ गया है की किसी आप सही गलत करने का विवेक खुद रखे क्युकी विचारवाद की जंग में सच को जगह नहीं मिलती है| सबसे बगैरत हरकतें आजकल राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों की देखने को मिल रही है, इसमें बीजेपी, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस जैसी जानी मानी पार्टियों के आका आतंकवाद क मुद्दे पे अपनी राजनितिक वोट बैंक की रोटियां सेकते हुए मिल रहे हैं, हाल ही में आये  बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बयान तो हमारे लोकतंत्र को न सिर्फ निराश करता है बल्कि राजनीती का एक घिनोना चेहरा दिखता है | दी हिन्दू के एक कॉलम ने छापा है  “How have they [Pakistan] got this encouragement before elections? After Parliament is over, when this type of thing happen, as a citizen of the country, I am in doubt. Why have we not taken action against Pakistan earlier? Why at the time of elections, you tell me?” Ms. Banerjee questioned at the State Secretariat.

सिर्फ यही नहीं कांग्रेस ने तो पुलवामा हमले के फिदायीन की नेशनल  हेरल्ड  में बायोग्राफी छाप डाली।, उनका बस चलता तो इसकी बायोपिक भी बनाने से भी वो नहीं कतराते |

मेजर विभूति ढौंढियाल और उनके साथ चार सपूतो ने शहादत देकर पुलवामा के मास्टरमाइंड को मार गिरा दिया हो मगर अभी भी देश की जनता में “ध ” नहीं होती दिख है | या तो देश एक सख्त कारवाही जैश जैसे संगठनो पे चाहता है या फिर एक ठोस डिप्लोमेटिक कदम जो पाकिस्तान के आतंकवाद फ़ैलाने के कर दे | इनमे से एक कदम देश के अंदर उपजे स्लीपर सेल को ख़तम करना भी है | बीबीसी के अनुसार IED भारत में सिर्फ अंदर से आ सकता जो एक प्रकार के स्लीपर सेल के होने का अंदेशा है |

राजनीतिज्ञों को यह सोचना होगा की उनकी चंद वोटों की राजनीती देश को निराशावादी बना सकती है | जहा एक तरफ देश की जवानी एक नए भारत की कल्पना को साकार करने में अपना वर्चस्व न्योछावर करने में नहीं हिचकिचाती है वही कुछ लोग अपने को तेजस्वी घषित करने में अराजक ताकतों का साथ देने लगते हैं | इन दो कौड़ी क राजनीतिज्ञों से बचने की जरूरत है क्योंकि अपना प्रोपेगंडा सफल करने क बाद इनसे मिलना और इनके दर्शन भी मुश्किल हो जाते हैं


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