बसंत के आमद की पहली किश्त है घुघूती त्यौहार

मकर सक्रांति उत्तराखंड में उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है | तरह तरह के पकवानो के बनने के साथ, उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल में उत्तरायण को घुघुति त्यौहार के रूप में  भी मनाया जाता है | उत्तरायण के स्वागत के लिए बागेश्वर जिले में उत्तरायणी कौथिक के नाम से बागनाथ मंदिर के प्रांगण में मेला लगा कर किया जाता है | पूस में कड़क ठंडी को ख़त्म  करते हुए माघ का महीना बसंत की पहली किस्त अदा करने आ जाता है | उत्तराखंड में घुघूती त्यौहार में आटे और गुड़ चाशनी को मिलाकर तेल में तलकर स्वादिष्ट पकवान तैयार किये जाते हैं | कुमाऊँ  के पहाड़ी इलाकों के घरों में घुघुते और फलों मालाएं बनाकर बच्चों पहनाई जाती है और दीर्घायु की कामना आमाएँ अपने गले लगाकर करती हैं।  

 माघ  बसंत की बयार भी बयां करता है, जिसको उत्तराखंड के पहाड़ो में ज्यादातर फाल्गुन मास में ही अहसास किया जा सकता है, इस कारण ही पहाड़ो में  होली का बड़ा महत्व है। बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि और होली जैसे त्यौहार महीने मुरझाई हुई जिंदगी में रंगत लौटा देते हैं, और फूलदेई से नवसंवत्सर में सनातन  प्रवेश करता है। 

घुघूती का आनंद इस मौसम में योग और व्यायाम करने वालो को ज्यादा पता  है, पूस की चुभती ठंडी शीतलहर अचानक अपनी चुभन त्यागकर योगियों के लिए सुगम हो जाती है।  तो यह मौसम व्यायाम उत्साहिक लोगो के लिए अमृत बनकर आता है।  

घुघूती की खुशबू  तभी हर साल एक प्रतीक बन कर  आती जिसमे आदमी अपनी अपनी आरामदेह रजाई और बिस्तरों  को छोड़ कर देश की प्रगति पे न्योछावर होने चल देता है। 


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